Monday, April 12, 2010

मेरे लब है " अशोक " तेरे नाम की ख़ुशबू !!!

इश्क़ की शाख पे खिलती  तेरे अन्दाम की  ख़ुशबू
है  बादे - सबा  के  लब पे  तेरे    नाम   की  ख़ुशबू


मेरी  तशनगी   बुझा  दो , दो  घूंट  अब पिला  दो
ये आँखें हैं  मये-मुहब्बत से  भरी  जाम की ख़ुशबू


जब कामिनी  के फूल खिले,  शबनम  की बूंद तले
फैलती  है  हर  तरफ  मये-गुलफाम   की   ख़ुशबू


चलते  रहो तुम  राह पे , थकना  न  कभी हार के
कदम को चूम लेंगी  इक  दिन  मुकाम की ख़ुशबू


ख़ुदा से हर दुआ में  बस  तुम्हे ही  मांगते  हैं हम
मेरे  लब  है  " अशोक "   तेरे   नाम   की   ख़ुशबू


* अन्दाम -- जिस्म ,
* बादे-सबा -- सुबह की पुरवाई हवा या ठंडी हवा ,
* तशनगी -- प्यास ,
* मये-मुहब्बत -- मुहब्बत रूपी मदिरा ,
* मये-गुलफाम -- फूलों की रंग जैसी मदिरा

---------  शायर  " अशोक "

33 comments:

Vijay Kumar Sappatti said...

ashok ji

bahut hi sundar gazal ....aakhri sher to bas maashaallah hi hai ... meri badhaiyi sweekar kare..

aabhar aapka

vijay

ई-गुरु राजीव said...

वाह क्या बात है. !!

Ashok said...

Bahut sundar gazal ke liye badhai Ashok ji

हरकीरत ' हीर' said...

इश्क़ के शाख पे खिलती तेरे अन्दाम की ख़ुशबू
है बादे - सबा के लब पे तेरे नाम की ख़ुशबू
सुभानाल्लाह .....!!

मेरी तशनगी बुझा दो , दो घूंट अब पिला दो
ये आँखें हैं मये-मुहब्बत से भरी जाम की ख़ुशबू
माशाल्लाह ......!!

जब कामिनी के फूल खिले, शबनम की बूंद तले
फैलती है हर तरफ मये-गुलफाम की ख़ुशबू

वल्लाह ....!!
चलते रहो तुम राह पे , थकना न कभी हार के
कदम को चूम लेंगी इक दिन मुकाम की ख़ुशबू
बहुत खूब .....!!

ख़ुदा से हर दुआ में बस तुम्हे ही मांगते हैं हम
मेरे लब है " अशोक " तेरे नाम की ख़ुशबू

दुआ कबूल हो ......!!

Pawan Meraj said...

चलते रहो तुम राह पे , थकना न कभी हार के
कदम को चूम लेंगी इक दिन मुकाम की ख़ुशबू

ashaar achha hai

रश्मि प्रभा... said...

मेरी तशनगी बुझा दो , दो घूंट अब पिला दो
ये आँखें हैं मये-मुहब्बत से भरी जाम की ख़ुशबू
waah...bahut hi badhiyaa

munna jee said...

मेरी तशनगी बुझा दो , दो घूंट अब पिला दो
ये आँखें हैं मये-मुहब्बत से भरी जाम की ख़ुशबू


namaskar...........ashok jee , sahi mayene me muhabbat ki khsboo bikher di aapne .........shubhkamnaye............

मधुछन्दा said...

Bas itna hi kahungi ki waah bhai waah. Fantabulous shayari.

रोहित said...

bahut khoob,sir!
aapne badi khoobsurati se apni bhavnaao ko is ghazal me piroya hai!!!

Kavi Anshul jain Nabh said...

ashokji bakaee achchi gazal hai

Raj said...

जब कामिनी के फूल खिले, शबनम की बूंद तले
फैलती है हर तरफ मये-गुलफाम की ख़ुशबू
wow....wow Ashok ji bahut pasand aapki yah pankityan.

vinodbissa said...

shandar rachanaa hai ............ ASHOK JI SHUBHKAMANAYEN.....

श्रद्धा जैन said...

चलते रहो तुम राह पे , थकना न कभी हार के
कदम को चूम लेंगी इक दिन मुकाम की ख़ुशबू

bahut sunder khyaal
bahut achchi gazal

padh kar bahut sakun mila

JHAROKHA said...

bahut hi unda gazaj ,bahut hi sndar avam prashanshniy abhivykti.
dil se dhanyvaad.
poonam

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया गजल है अशोक जी।बधाई स्वीकारें।

anjana said...

अच्छी रचना....

usha rai said...

मेरी तशनगी बुझा दो , दो घूंट अब पिला दो
ये आँखें हैं मये-मुहब्बत से भरी जाम की ख़ुशबू !
आपाधापी कीजिन्दगी में चैन ओ सुकून का पल है आपकी शायरी ! आभार !

डॉ० डंडा लखनवी said...

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इसे पढ़के मिला जो सुख उसे मैं कह नहीं सकता।
बिना बांधे हुए तारीफ के पुल रह नहीं सकता।
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
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अरुण 'मिसिर' said...

बहुत अच्छी असरदार
गजल
बधाई

Shri"helping nature" said...

aap se gazal sikhni padegi khub badhiya

वेदिका said...

बहुत शानदार रचना !!
कामिनी की जगह कोई और शब्द लीजिये ना|
शुभकामनायें

दिगम्बर नासवा said...

Bahut khgoob gazal ... matla padh kar ehsaas ho gaya ki paripakv shaayer ka kalaam hai ... bahut hi lajawaab ...

अविनाश वाचस्पति said...

बहुत बेहतर रचना है

उर्दू शब्‍दों के अर्थ देकर

आपने मुझ जैसे अज्ञानी के लिए

भी समझने का रास्‍ता खोला है

आभारी हूं।

Amit said...

bhaut ache...

Prem Farrukhabadi said...

चलते रहो तुम राह पे , थकना न कभी हार के
कदम को चूम लेंगी इक दिन मुकाम की ख़ुशबू

bahut pyari rachna lagi Badhai!!

गनेश जी बागी said...

अशोक जी नमस्कार , मेरा नाम गनेश जी "बागी" है, मै पेशा से बिहार सरकार मे सिविल इंजिनियर हू तथा पटना मे कार्यरत हू, साहित्य से शौक है इसलिये एक सोसल वेब साईट www.openbooksonline.com चलाता हू , मैने आपका ब्लॉग पढ़ा सभी पोस्ट एक से बढ़कर एक है, आप बहुत ही अच्छा लिख रहे, मै आपके उबुर-ए-कलम से प्रभावित हू ,मै चाहता हू की आप ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार मे शामिल होकर अपनी रचनाओ को www.openbooksonline.com पर भी पोस्ट करे जिससे आपकी रचनाओं को और भी लोग पढ़ सके, धन्यवाद सहित आपका
गनेश जी "बागी"

अरुणेश मिश्र said...

अशोक भाई !
बहुत लाजबाब लिखा ।
बधाई ।

Parul said...

wow...sir
kamaal ka likha hai..
kamaal ka !!

RAJWANT RAJ said...

chlte rho tum rah pe thkna na kbhi har ke
kdm ko chum legi ik din mukam ki khusbu
jindgi ke hr pl ko isi dua ki jrurt hoti hai .

pukhraaj said...

is gazal me tou khushboo hi khushboo hai ... mahakti huyi gazal ..

SURINDER RATTI said...

Ashok Ji,
Namaskaar,
Pehli baar aapke bolg per aaye hain bhaut hi sunder bhaav vichhar likhe hain is rachna mein.

इश्क़ की शाख पे खिलती तेरे अन्दाम की ख़ुशबू
है बादे - सबा के लब पे तेरे नाम की ख़ुशबू
Surinder Ratti

masoomshayer said...

ashok bahut pasand aya har ek sher mujhe

परावाणी : Aravind Pandey: said...

खुशबू के एक कश में दिल की कशमकश मिटी.
हमकश की कशिश इश्क की, बेइंतहा बढी --

खुशबू का सार्वभौम अनुभव सुन्दर और सुगन्धित..