Tuesday, July 27, 2010

भींगे अश्क़ों में, दिल जला-जला-सा है !!!


दिल    का      दीया   बुझा-बुझा-सा है
कोई   हमसे            जुदा-जुदा-सा  है


तनहा , उदास ,  खामोश  हर   लम्हा 
मन   का    आँगन    सूना-सूना-सा है


उसकी  बेवफाई  की  दास्तां  न  पूछो
भींगे अश्क़ों में, दिल जला-जला-सा है


ख़्वाब   जो   हकीक़त  न   बन   सका
हर ख़्याल का निशां मिटा-मिटा-सा है


टूटी  है  आरज़ू,  आइनें  की  तरह
"अशोक" गमे-इश्क़ में डूबा-डूबा-सा है


 -----  शायर  " अशोक "

32 comments:

masoomshayer said...

achhe sher likhe hain achaa likhate ho

Hamid Siddharthi said...

nice janab

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत सुन्दर गजल है बधाई स्वीकारें।

chandrapal said...

उसकी बेवफाई की दास्तां न पूछो
भींगे अश्क़ों में, दिल जला-जला-सा है...ye lines kamal ki hai....apne bare me batane ke liye sukriya..ab me aapka blog regular dekhunga...

Kusum Thakur said...

अच्छी रचना ...बधाई !!

Babli said...

आपने बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बहुत बढ़िया लगा!

vineet mishra.. said...

ख़्वाब जो मेरा हकीक़त न बन सका
हर ख़्याल का निशां मिटा-मिटा-सा है

her sher umda..
pahli baar aaya achha lga.
ab aata rahunga..

vineet mishra.. said...

kabhi waqt mile to dekhiyeg..
http://tajinindia.blogspot.com

हरकीरत ' हीर' said...

टूटी है हर आरज़ू, आइनें की तरह
"अशोक" गमे-इश्क़ में डूबा-डूबा-सा है

बस बिलकुल ही डूब मत जियेगा ......!!
यूँ हम हैं खींच कर निकालने के लिए ....
.

दिल के भाव बखूबी डूब tair rahe हैं .....!!

Ashok said...

bahut sundar,,,,badhayi

वन्दना said...

kya kahun ab is par..............sara dard undel kar rakh diya.

abhishek said...

bahoot sahi kaha hai apne baare me




bilkul aisa hi hai jitna mai aapko janta hoon...........

kumar zahid said...

behatar kosjish--
bas k
rang lati hai hina patthar mein pis jane k bad--

रचना दीक्षित said...

उसकी बेवफाई की दास्तां न पूछो
भींगे अश्क़ों में, दिल जला-जला-सा है
सुन्दर गजल है

Mrs. Asha Joglekar said...

उसकी बेवफाई की दास्तां न पूछो
भींगे अश्क़ों में, दिल जला-जला-सा hai .
Kya bat hai Ashok jee.

संजय भास्कर said...

सुन्दर गजल है

Vijay Pratap Singh Rajput said...

वाह ! वाह ! क्या बात है !

राकेश कौशिक said...

बहुत सुंदर भावपूर्ण ग़ज़ल

अरुणेश मिश्र said...

टूटी है हर आरजू आइने की तरह ......
लाजबाब ।

usha rai said...

वह क्या बात है ...गुनगुनाने को जी चाहता है !संगीतमय प्रस्तुती के लिए बधाई !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरती से लिखे हैं जज़्बात ....अच्छा लगा पढ़ना

nilesh mathur said...

बहुत सुन्दर!

JHAROKHA said...

bahut khoob surat gazal.isko yaad karne ki koshish kar rahi hun.
poonam

आशीष/ ASHISH said...

अरे असोक बबुआ,
ई सब दुई-दुई बेर काहे बा? एगो बार से काम नाहीं चलिबे का?
हा हा हा.....
माफ़ करना दोस्त! हँसता हुआ पैदा हुआ था..... मेरी गलती नहीं!
अच्छा लिखा है आपने!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत सुन्दर !

rajeev matwala said...

Behtreen gajal ke liye bdhai.....

rajeev matwala said...

kya mancho par aana jana hota hai...ydi haan to cd uplabdh ho sakti hai....

anu said...

टूटी है हर आरज़ू, आइनें की तरह
"अशोक" गमे-इश्क़ में डूबा-डूबा-सा है

बहतरिन गज़ल ....

Abnish Singh Chauhan said...

"दिल का दीया बुझा-बुझा-सा है
कोई हमसे जुदा-जुदा-सा है"-
वह, बहुत खूब कहा है आपने. बधाई स्वीकारें

Hadi Javed said...

दिल का दीया बुझा-बुझा-सा है
कोई हमसे जुदा-जुदा-सा है
बहुत खुबसूरत और दिलनशी ग़ज़ल कही है अशोक साहब आपने मुबारकबाद

meri bhavnaayein.................. said...

Neha....

dil ke jalne ka haal.....waah..
bahut acha likha hai....good 1.

Richa P Madhwani said...

बहुत सुन्दर