Friday, March 5, 2010

कहाँ जाऊं मैं दहकता आफताब लेकर !!!

                                            कहाँ  जाऊं मैं  टूटे हुए ख्वाब लेकर

 कहाँ जाऊं मैं दर्द का सैलाब लेकर ||

 

 

दिल जला है बहुत गमे-इश्क मे यारों  

  कहाँ जाऊं मैं दहकता आफताब लेकर ||

 

........शायर  " अशोक "

3 comments:

डॉ० डंडा लखनवी said...

क्या मतला कहा है ......

mridula pradhan said...

wah.

वन्दना said...

gazab kar diya..........seedha dil mein utar gaye sher.