Sunday, July 17, 2011

कभी-कभी खामुशी भी !!!

कभी-कभी खामुशी भी
बहुत कुछ कह जाती है

बंद लबों पे ,
दिल का हर अफसाना ,
आँखों की कलम से ,
खुली किताब की तरह
लिख जाती है

कभी-कभी खामुशी भी
बहुत कुछ कह जाती है


---- शायर  " अशोक "

13 comments:

वन्दना said...

खामोशी ही तो बोला करती है…………सुन्दर्।

SAJAN.AAWARA said...

kuch hum kahen kuch tum kaho,par is kadar tum khamos na raho,,,,,
jia hind jai bharat

sushma 'आहुति' said...

हाँ ..... बहुत बार ऐसा होता है बहुत खुबसूरत ख़ामोशी की अभिवयक्ति.....

vidhya said...

हाँ ..... बहुत बार ऐसा होता है बहुत खुबसूरत ख़ामोशी की अभिवयक्ति.....

Ehsaas said...

achha ehsaas....sundar shabd...!!


http://teri-galatfahmi.blogspot.com/

somali said...

khamoshi se badi abhivyakti kya hogi

web hosting india said...

Hi can you share some more post.you write wonderful.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

कभी-कभी खामुशी भी
बहुत कुछ कह जाती है


क्या बात कही है …
शायर साहब अशोक जी
:)
सस्नेह अभिवादन !


ख़ामोशी जब बहुत कुछ कह जाए तो कोलाहल क्या कुछ नहीं कहेगा ?


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई-शुभकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

somali said...

khamoshi wo bayan kar jati h jo shabd nahin kar pate.....

NISHA MAHARANA said...

vastav me khamoshi bina khe kuch bhut kuch kh jati.meri kvita meri aankhien me pdhe avm khamosh nazr may .ko avshay pdhen acha lgega.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

शायर-ए-आज़म अशोक जी
नमस्कार !

आपकी नई रचना सुनने-पढ़ने के इरादे से आ गया था … :)
व्यस्त होंगे … व्यस्त रहना भी चाहिए …
अभी कुछ पुरानी पोस्ट्स पढ़ूंगा आपकी … ताज़ा रचनाएं अगली बार सही :)

आपने शस्वरं को अपने स्नेह और मित्रता से धन्य किया … आभारी हूं ।


हार्दिक शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार

संजय भास्कर said...

वाह बेहतरीन !!!!
http://sanjaybhaskar.blogspot.com/

shyam singh said...

bahot khub Ghajal maza aa jae ek baar jo padh le