Friday, September 9, 2011

दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है !!!

दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है 
रिश्ता दिल का दिल से है उसको तो निभाना है 


बोझ पापियों का है  धरती माँ के सीने पर 
राम बन के प्रभु तुझको इस जहां में आना है 


फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से 
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है 


प्यार के पुजारी हैं हमको डर से क्या मतलब 
प्यार का बुलावा है और हमको आना है 


सो रहा है मुद्दत से जाग बेखबर अब तो 
माँ का क़र्ज़ है तुझ पर अब तुझे चुकाना है


------  शायर   "अशोक "

33 comments:

Suraj said...

Bahut behtarin hai shayar bhai.
Sach kahte ho aap darde dil chhupana hai aur muskurana hai........maa ka karj chukana hai.....

Dil ko chhu gayi aapki ye rachna...

chaubeyrahul said...

din aur rat ki bhatin milna hai aur bichar jana hai ,sahi kaha shayar ashok,"Darde-Dilchupana hai aur muskarana hai"

Hum to aapki shyari me aise khoye,jaise koi bichara jamana hai,kya kare,"Rista dil ka dil se hai use to nibhana hai"

yuhin hin likha karo aap"kyonki hamare jaise logo ka yahi Thikana hai"

avinashramdev said...

jab jab dharti par atyachar badhta hai to shree bhagwan ka wada hai wah jaroor aayange

Jitendra LIC said...

Wah.... Ashok jee....!!!!!!!!!!!!!
WAH.........!!!!!!!!!!!!
Aapke ehsas me kitni yathartata hai ye aapki amulya rachna se spashta hoti hai....!!!!!
Aakhon ke raste Man Mastik me chate huye Dil me uttar gayi......

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है

बहुत खूबसूरत गज़ल ... मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार

रचना दीक्षित said...

दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है
रिश्ता दिल का दिल से है उसको तो निभाना है.

सुंदर एहसास से परिपूर्ण खूबसूरत काज़ल. शुक्रिया मेरे ब्लॉग पर आने के लिए.

राजीव तनेजा said...

फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है

बहुत ही बढ़िया

सर्वत एम० said...

क्या बात है बड़े ज़बरदस्त शेर रच डाले. एक पल तो मैं भी भौंचक्का रह गया. भाई ऐसे शेर कहोगे तो मुझे कौन पूछेगा?

संजय भास्कर said...

बहुत खूबसूरत गज़ल ...

RAMKRISH said...

Bahut he sunder pankhtiyaan hai Ashok ji,...Apse aise he khubsurat poems ki aasha rakhte hain...Rgds RK

Shayar Ashok : Assistant manager (Central Bank) said...

Sarwat Jamal : सर जी, आपके आशीर्वाद से ही तो ये गज़ल बनी है ,
वर्ना हम जैसे शायर तो यूँ ही गुमनाम हो जाते ,
अगर आपका हाथ जो माथे पे ना होता . ..
सही मायने में असली तारीफ के हकदार तो आप ही हैं ||

vandana said...

दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है
रिश्ता दिल का दिल से है उसको तो निभाना है

फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है

बहुत बढ़िया शेर

prritiy---------sneh said...

फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है
.
.
.
सो रहा है मुद्दत से जाग बेखबर अब तो
माँ का क़र्ज़ है तुझ पर अब तुझे चुकाना है

vaah bahut hi achha racha hai, achha laga padhna

shubhkamnayen

munna jee said...

NAMASKAR , JANAB KAISE HAI AAP

AAPKI RACHNAYE KAFI ASARDAR HOTI HAI


KRIPYA ISKO BARKRAR RAKHE

TAHE DIL SE SHUKRIYA .......

MUBARAKBAD...........

munna jee said...

फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है



WAH WAH WAH ..........
KYA BAT HAI .........KABILE TARIF ALFAJ



AAPSE BAHUT DIN MULAKAT NAHI HUI KAHA HAI AAJ KAL JANAB .....CBI ME BUSY HO GAYE HAI AAP?

JHAROKHA said...

ashok ji
bahut hi utsaah -vardhak tath prerak dayak hai aapki yah prastuti.
bahut hi sateek baat-----
badhai
poonam

K-LINK HEALTHCARE said...

Bhut sundar prastuti.....Ashok ji, Yakinan,,,,badhayi

kumar zahid said...

दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है
रिश्ता दिल का दिल से है उसको तो निभाना है

अशोकजी! बढ़िया कहा आपने..
अर्ज है....

मुस्कुराते हैं हम बहाने से
दर्द छुपते नहीं छुपाने से
जब भी पत्थरीली राह से निकले
क्यों डरे कोई चोट खाने से

MEDIA GURU said...

khoobsurat rachna

Suman Dubey said...

अशोक जी नमस्कार्। सुन्दर पंक्तियां। बोझ पापियों का है धरती माँ के सीने पर राम बन -----

Kailash C Sharma said...

सो रहा है मुद्दत से जाग बेखबर अब तो
माँ का क़र्ज़ है तुझ पर अब तुझे चुकाना है

बहुत प्रेरक और भावपूर्ण प्रस्तुति..

Dimple Maheshwari said...

HMM...wakai bahu hi badhiya likhte hian aap....jitni tareef ki jaaye kam hain....tareef karun kya uski jisne e gajal tujhe bnaya,,,behad achha aur dil se likha hian aapne....hume bhi sikhayiye sirji...

सतीश सक्सेना said...

एक अच्छी रचना ....
शुभकामनायें !

ITIKA RAJPUROHIT said...

bhut badhiya rachana per badhi ho.

SAJAN.AAWARA said...

bahut hi sarthak lekh likha hai , jarurat hai hame raam ki
jai hind jai bharat

श्रद्धा जैन said...

फट पडी है यह धरती बारिशें न होने से
रंजो-गम ही उगते हैं अब इन्हें ही खाना है

bahut achcha sher.. bahut achchi gazal..

amrendra "amar" said...

बेहतरीन रचना......बहुत ही बढि़या ।

amrendra "amar" said...

बहुत सुन्दर भावो से भरी पोस्ट......शानदार |

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...






प्रिय बंधुवर अशोक जी
सस्नेहाभिवादन !

लाजवाब भाई !
सर्वत जी जैसे मंझे हुए ग़ज़लकार के कुछ कहने के बाद क्या बचता है

हाऽऽ हाऽऽऽ… !

वाकई , अच्छी ग़ज़ल है …
दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है
रिश्ता दिल का दिल से है उसको तो निभाना है


बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार

विशाल said...

दर्दे-दिल छुपाना है और मुस्कुराना है
रिश्ता दिल का दिल से है उसको तो निभाना है

vaah.
bahut khoob.

dheerendra said...

बहुत सुंदर गजल बधाई...
मेरी पोस्ट-वजूद- में स्वागत है

dheerendra said...

बहुत सुंदर गजल बधाई...
मेरी पोस्ट-वजूद- में स्वागत है

sanjeedgi said...

बोझ पापियों का है धरती माँ के सीने पर
राम बन के प्रभु तुझको इस जहां में आना है

Ashok ji ye to theek hai ki papiyon ki is dharti ko humko he muqt karana hai, lekin jis raam ki kalpna aapne ki hai us raam ki kalpna bharat ki adhiktar mahilayen or ladkiyan ni karti.